Custom Search
Showing posts with label फार्मा. Show all posts
Showing posts with label फार्मा. Show all posts
Friday, May 16, 2008
कोर्ट का हर आदेश मानना जरूरी नहीं होता..
... हर अदालती आदेश की अवहेलना मानहानि नहीं है... न ही सरकार के लिए हर वादा पूरा करने की मजबूरी है... संसदीय कमेटी की रिपोर्ट को मानने के लिए सरकार बाध्य नहीं है... लेफ्ट पार्टियां जनहित के सारे मुद्दे नहीं उठाती... न ही आपकी सेहत विपक्ष के एजेंडे पर है। क्योंकि इन सबसे बड़ा है बड़े कॉरपोरेट का हित। कॉरपोरेट सेक्टर और राजनीति के लगभग खुल्लमखुल्ला रिश्तों और इस पर कोर्ट की चुप्पी की कहानी पढ़िए, आज के नवभारत टाइम्स में। शीर्षक है - सस्ती दवा, खोजते रह जाओगे
Sunday, May 11, 2008
सस्ती दवा के लिए यूपीए सरकार की ओर मत देखिए!
दवा नीति बनाने में नाकामी के चार साल
जब आप दवा लेने जाते हैं तो यह संभव है कि आपको एक ब्रांड दस रुपये का और दूसरा ब्रांड 200 रुपये का मिले। दोनों दवाएं नामी कंपनियों की होंगी। आप इनमें से कौन सी दवा खरीदेंगे? 10 रुपए वाली? नहीं, आप वही दवा खरीदेंगे जो आपका डाक्टर पर्ची पर लिखकर देगा। दरअसल यह मामला 55 हजार करोड़ रुपये की भारतीय दवा इंडस्ट्री की दिशा तय करता है।
पूरा लेख पढ़िए जागरण के ई-पेपर में।
जब आप दवा लेने जाते हैं तो यह संभव है कि आपको एक ब्रांड दस रुपये का और दूसरा ब्रांड 200 रुपये का मिले। दोनों दवाएं नामी कंपनियों की होंगी। आप इनमें से कौन सी दवा खरीदेंगे? 10 रुपए वाली? नहीं, आप वही दवा खरीदेंगे जो आपका डाक्टर पर्ची पर लिखकर देगा। दरअसल यह मामला 55 हजार करोड़ रुपये की भारतीय दवा इंडस्ट्री की दिशा तय करता है।
पूरा लेख पढ़िए जागरण के ई-पेपर में।
Subscribe to:
Posts (Atom)
Custom Search

