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Thursday, November 19, 2009

मेरिट में आगे, जिंदगी में पीछे!


कल आईआईएमसी में इस बात पर चर्चा हुई कि लड़कियां जीवन के विविध क्षेत्रों में टॉप पर क्यों नहीं हैं। जबकि 10वीं और 12वीं की कक्षाओं में वो बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं। सीबीएसई के तमाम पिछले नतीजे इस बात की पुष्टि करते हैँ। इस बारे में पूजा मीणा, स्नेहा शर्मा, लता कश्यप, आशिमा, स्मिता मुग्धा और अमृता सिंह ने विचार रखे और बताया कि किस तरह सामाजिक आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारणों से वो शिखर पर पहुंचने से रह जाती हैं।

3 comments:

IRFAN said...

dileepji
bahut achchi baat hai,aur badi chinta bhi.logon ka nazariya abhi bhi ladkiyon ke prati nahi badla hai.
har saal cbse vagairah ke result dekhkar hum khush hote hain magar phir kya...?

रंगनाथ सिंह said...

ये क्या पोस्ट है ? मुद्दा तो सही उठाया लेकिन कुछ कहा नहीं। खैर कभी-कभी प्रश्न सामने रखना ही महत्वपूर्ण होता है...

Ek ziddi dhun said...

rangnath bhai, kya kaha jaye? is sawal ka jawab yani is vidambna ki vajah sabhi ko maloom hai.
sochiye Rajasthan ka MEENA samaj thok men IAS aur IPS paida karta hai lekin Mrs ya Miss MEENA ko IAS_IPS talashna kafi mushkil hota hai

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