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Thursday, October 18, 2007

सबेरा

स्तुति रानी

संभल जाओ कि सफ़र लंबा है

एक छोटा पत्थर दे सकता है

जख्म गहरा

गिरा सकता है तुम्हें मुँह के बल

उठ कर खडा भर हो जाना काफी नहीं होगा,

क्योंकि तुम्हें तो अभी जाना है चीर कर कुहासा

वहाँ तक जहाँ से खींच लानी है

वह रोशनी जो दूर कर सके

दीपक तले का अँधेरा

तब जाकर होगा तुम्हारा सबेरा

2 comments:

Udan Tashtari said...

सही है.

pooja prasad said...

shuru me sachet kartin ant me wishwas deti panktiyo par man reejh gaya Stuti. baantne or kehane ka ye silsila jari rakhen.

Pooja Prasad

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