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Thursday, March 6, 2008

ब्रांडेड भिखारियों की दुकान


- सौरभ के. स्वतंत्र

पटना का हर्ताली चौक हो या दिल्ली का जंतर-मंतर ! इसके आगोश मे आने के बाद कार वाले लोग बेकार और बेकार लोग आबाद हो जाते हैं. एक दिन मैं भी बेकार के मानिंद जंतर-मंतर पहुँचा. जिन्दाबाद-मुर्दाबाद के नारों से गूंजता वातावरण बड़ा ही रमणीय लगा. कहीं लोग धरना देते वायलिन, ढोलक की थाप पार धुन निकल कर आपना समय काट रहे थे तो कहीं सोकर .

तभी मेरी मुलाकात एक बम्बैया बाबू से हुई. अभी जीवन के १७-१८ बसंत देखे होंगे जनाब ने. पर इरादा एकदम बुलंद था. इनकी मांग थी की रेहड़ी-पटरी पर सब्जी बेचने वालों के साथ न्याय किया जाए. जब मैंने पूछा की भइया इ सब्जी बेचने वालों को कौन सी न्याय की जरुरत आन पड़ी. तब उसने विस्तार से बताया- बम्बई मे सब्जी की दुकान थी साहब..बहुत अच्छी चल रेली थी. दो टाइम का रोटी भी आराम से मिल जाता था. भाई लोगो का हफ्ता भी चुकता हो जाता था साहब..लाइफ एकदम स्मूथ चल रेला था ... साहेब प्रॉब्लम तब आया जब ये मोबाइल बेचने वाले मामू लोग ने सब्जी का बड़ा-बड़ा दुकान खोल लिया...दुकान बोले तो एकदम झकास...एकदम सीसा-वीसा लगाके..

...जब वही फ्रेश-फ्रेश सब्जी उधर मामू लोग एयर कन्डीसन दुकान मे हमारे ही दम मे बेच रेला है तब हमारे कस्टमर लोगो को भी उधर ही जाने को मांगता है....तब हमारे पेट पर लात पड़ने का है न साहब....तब मैंने सोचा कमाई-धमायी तो सब चौपट ही गया. अब भाई लोगो को फोकट मे हफ्ता देने से बढ़िया ...न्याय के लिए आवाज़ उठाई जाए ...तभी से मैं इधर जंतर-मंतर पर एक साल से धरना दे रहा है.. पर इधर कोई सुनने को मांगता ही नही .

अब मैं भी क्या कहता बम्बैया भाई से....सांत्वना देना ही उचित समझा और उसकी पीडा़ सुन मैं यह कहने को विवश हो गया की तेरी मांग एकदम उचित है...बोले तो एकदम उचित .

अभी मैं इन जनाब की व्यथा सुन आगे बढ़ा ही था कि एक भिखारी मेरे पीछे पड़ गया...और कहने लगा- साब दे दो ना साब बच्चा भूखा है...साब एक रुपया दे दो... मैं भी थोड़ा बम्बैया बन बैठा और उसी लहजे मे उस से कहा अभी तेरे को इधर से निकलने का...और बड़ा साहब लोगो से पैसा नही मांगने का...बड़ा साहब तेरे हाथ मे इतना चिल्लर पैसा देख लिया न तब समझो तेरा कम फिनिश.

...फिर बड़ा साहब लोग रोड पर अपना ब्रांडेड भिखारी परफ्यूम लगाके दौड़ाने लगेगा .फिर तेरे को कौन भीख देगा... तेरे शरीर से तो बदबू आ रेली है बाप..फिर तू भी इस बम्बैया बाबू के माफिक इधर जंतर-मंतर और हर्ताली चौक पर धरना देता नजर आएगा..इसलिए इधर से अभी निकल लेने का..वो देखो बड़ा साहब आ रेला है .. और भिखारी तेज कदमों से वहा से निकल गया ...

4 comments:

Mired Mirage said...

बहुत बढ़िया ।
घुघूती बासूती

rajan said...

ye hai asli loktantra jahan sabki charcha ho rahi hai...

rajan said...

ye hai asli loktantra jahan sabki charcha ho rahi hai...sahi farmaya swatantraji

कमलेश प्रसाद said...

swagat hai swatantra ji, bas dharadhar chaapakhaana chalate raho

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