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Thursday, January 10, 2008

गीता के 18वें अध्याय का 21वीं सदी में पुनर्पाठ

ये एक प्रोजेक्ट आया है मेरे पास। अगले कुछ महीने इस विषय पर काम करना है। स्रोत सामग्री की तलाश है। गीता के बारे में अगर आपके पास, खासकर 18वें अध्याय के बारे में कोई व्याख्या, कोई टीका, कोई मूलग्रंथ, कोई अनुवाद उपलब्ध है और आप उसे शेयर करना चाहते हैं, तो कृपया मुझे dilipcmandal@gmail.com पर सूचित करें। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पटना या पुणे जैसे शहरों के बुक स्टोर या लाइब्रेरी का नाम भी सुझा सकते हैं। स्रोत सामग्री संस्कृत, हिंदी, इंग्लिश या बांग्ला में हो तो मेरे लिए सुविधा होगी। इस प्रोजेक्ट के बाद जो सामग्री प्रकाशित होगी, उसमें तमाम स्रोतों का जिक्र किया जाएगा। सहयोग मिलने की उम्मीद के साथ - दिलीप मंडल

4 comments:

अजित वडनेरकर said...

बढ़िया काम है। बधाई। लगे रहें ।
कुछ काम का होगा तो ज़रूर बताएंगे। समय समय पर । निश्चिंत रहें।

संजय तिवारी said...

भैया विषय तो बहुत अच्छा है. अलग से ई-मेल बाजी होगी इस विषय पर आपसे.

Anonymous said...

Dear Dilip Jee
Nai Dilli ke Qutub Institutional Area ke Lal Bahadur Shashtri Sankrit Vidyapith, Delhi University ki central library, Sampoornanand Sanskrit Vishvidyalaya, Banaras aur Dilli ke kamala nagar (Bunglow Road)me Chaukhambha Prakashan(sanskrit Sahitya ke Bade Prakashak hai)aur Motilal Banarasidas Book Store se aapako kafi sahayata mil sakti hai. Lokmanya Tilak aur Aurbindo ki Geeta par Tika ke bare me to aapko pata hi hoga.Mujhe aur koi jankaari milati hai to aapako suchit karunga.
Rajeev Ranjan

आशीष महर्षि said...

Dillip ji Namskar
shayad yh aapke kaam aaye..


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