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Sunday, January 6, 2008

जाट तख्त जीतेगा या मल्लिका सेहरावत?

दिलीप मंडल

जाट समाज के लिए रोल मॉडल कौन है? रोहतक की मल्लिका सेहरावत को देखिए, जो परंपरागत परिवार से निकलकर मुंबई पहुंचती है और फिल्मी दुनिया में अपनी धाक कायम करती है। नाम बदलने से उसे एतराज नहीं, संस्कृति की ऐसी की तैसी करने से उसे परहेज नहीं। जाट बिरादरी को शिकायत है कि मल्लिका अपने लत्ते क्यों उतार देती है। लेकिन फिल्मों में काम तो ईशा देयोल भी कर रही हैं और महिमा चौधरी भी। और भी कई जाटनियां हैं जो फिल्मों से लेकर टीवी में काम कर रही हैँ। जाटों की साइट्स में उनके नाम बड़े गर्व से लिखे गए हैं।

उनके मुकाबले हैं घपलों-घोटालों के लिए चर्चित और विजिलेंस जांच में फंसे और अब अपनी राजनीति चमकाने में जुटे रिटायर्ड आईएएस अफसर वीरेंद्र सिंह । वीरेंद्र सिंह अखिल भारतवर्षीय जाट महासभा के अध्यक्ष हैं और महासभा की चर्चा इन दिनों जाट तख्त बनाने की वजह से है। जाट तख्त ने कहा है कि शादी में जाति के नियमों को तोड़ने वालों का खून बहाने वालों का सम्मान किया जाएगा और उन्हें कानून से बचाने के लिए सारा खर्च जाट तख्त उठाएगी। उन्हें खास ऐतराज सगोत्रीय विवाहों पर है।

वीरेंद्र सिंह पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिल चुके हैं और चाहते हैं कि मैडम जाटों को केंद्र सरकार की नौकरियों में ओबीसी कोटे में शामिल कर आरक्षण दें। राजस्थान में जाटों को ओबीसी कोटे में शामिल किए जाने के बाद जिस तरह से गुर्जर और मीणा समुदाय आपस में भिड़ गए हैं, उसे देखते हुए लगता नहीं है कि कांग्रेस जाटों के बारे में ऐसा कोई फैसला आसानी से कर पाएगी।

हिंदू जाटों की बात करें तो ये उत्तर-पश्चिम भारत में मुख्य रूप से खेती करने वाली अवर्ण यानी अद्विज (शूद्र) जाति है। जाट जनेऊ नहीं पहनते और उनमें विधवा विवाह का चलन भी है। लेकिन खेती से आई समृद्धि से उनका सामाजिक स्तर काफी ऊपर पहुंच गया है। साथ ही जाट देश के उस इलाके से हैं, जिनका बड़ा हिस्सा 1857 के विद्रोह से अलग रहा। इन इलाकों में अंग्रेजों ने अपनी फौज के लिए भर्तियां कीं। 14th Lancers, 6th Jat Light Infantry, 10th Jats, 12th Pioneers और 48th Pioneers में मुख्य रूप से जाटों की ही भर्तियां हुईं। फौज की भर्ती का इलाका होने के कारण अंग्रेजों ने इन इलाकों में नहर आदि खूब बननाए। साथ ही अविभाजित पंजाब में पंजाब लैंड एलिएनेशन एक्ट, 1900 भी पास किया जिसके तहत दलितों समेत कई जातियों को कृषि भूमि की खरीद से वंचित कर दिया गया। इसका असर आज ये है कि पंजाब में दलित आबादी लगभग 30 फीसदी है पर उनके पास 7 परसेंट से भी कम जमीन है। और ये सारी जमीन भी उन्होंने आजादी के बाद खरीदी है।

हालांकि इस इतिहास को दोहराने से कुछ बदलेगा नहीं। लेकिन उत्तर पश्चिमी भारत के सामाजिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है पंजाब लैंड एलिएनेशन एक्ट। बहरहाल पंजाब और हरियाणा में दलितों ने खुद को हालात के साथ ढालकर अच्छी तरक्की की है। पंजाबी दलित गांवों से निकले और टैक्सी चालक से लेकर मैकेनिक के काम में देश भर में छा गए। वो बड़ी संख्या में कैनेडा और अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और माल्टा, साइप्रस तक पहुंचे।

आज हालत ये है कि दलितों के डेरे पंजाब हरियाणा के कई शहरों में गुरुद्वारों और मंदिरों से ऊंचे हो गए हैँ। सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ भी वो उठा रहे हैँ। उनका श्रम अब रंग ला रहा है। दलित समुदाय में हंस राज हंस जैसे गायक देश विदेश में अपने दम पर नाम कमा रहे हैं। जाटों के प्रभाव वाले इलाके की मायावती देश के सबसे बड़े राज्य में शासन संभाल रही है। पंजाब के एक दलित कांशीराम ने देश के एक बड़े हिस्से की राजनीति को निर्णायक रूप से बदल दिया है। गोहाना का दलित ठेकेदार लारा जाटों को बर्दाश्त नहीं होता। दूसरे समुदायों का उभार प्रभावशाली समुदायों में ईर्ष्या पैदा कर रहा है।

ऐसे सामाजिक तनाव के समय में जातियां और धार्मिक समुदाय में अंतर्मुखी होने और खुद को अंदर से मजबूत करने के नाम पर बाहरी प्रभावों से मुक्त होने की प्रवृत्ति बेहद आम है। क्या देश भर में ओबीसी का दर्जा मांग रहा जाट समुदाय अपनी जातीय श्रेष्ठता को लेकर किसी भ्रम में है? वीरेंद्र सिंह जैसे हीरो क्या जाट समुदाय को चाहिए? इन सवालों के जवाब जाट समुदाय के अंदर से आएंगे। वैसे वीरेंद्र सिंह की बातों को खुद उनके समुदाय में जिस तरह अनसुना किया जा रहा है, उसकी वजह से वो ऊंचा और तीखा बोलने लगे हैं। जाटों में अभी तो मल्लिका के नाम का डंका बज रहा है। किसी भी जाट लड़की या लड़के से पूछ लीजिए।

2 comments:

b said...

bhangi ke chode ye bata jat shudra kaise hae.vadic kshatriya kheti nahi karte thae ya vidhwa vivah.agar jat sudra hae tau lord bhudha,mahaveer swami,shri krisna,balram bhi sudra hone chahiye

frank said...

जाटों के बारे मैं आधा-अधुरा ज्ञान है आपको मल्लिका के अलावा कोई नाम याद नहीं आया पहिले जाट इतिहास पढ़िए और साथ ही आदिग्रंथो को भी तो शायद आपको जाटो की उत्पत्ति और इतिहास के बारे मैं भलीभांति ज्ञात हो जायेगा और हाँ शायद आपको अपनी जाती व उत्पति के बारे में भी पता चल जायेगा

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